Friday, July 19, 2013

019-शब ख़ुमार-ए-शौक़-ए-साक़ी

शब, ख़ुमार-ए-शौक़-ए-साक़ी, रस्तख़ेज़-अंदाज़: था
ता मुहीत-ए-बाद: सूरत-ख़ान:-ए-ख़मियाज़: था

यक क़दम वहशत से, दर्स-ए-दफ़्तर-ए-इमकाँ खुला
जाद:, अज्ज़ा-ए-दो `आलम-दश्त का, शीराज़: था

मान`-ए-वहशत-ख़िरामीहा-ए-लैला कौन है
ख़ान:-ए-मजनून-ए-सहरा गर्द, बे दरवाज़: था

पूछ मत रुस्वाई-ए-अंदाज़-ए-इस्तिग़ना-ए-हुस्न
दस्त मरहून-ए-हिना, रुख़सार रेहन-ए-ग़ाज़: था

नाल:-ए-दिल ने दिये औराक़-ए-लख़्त-ए-दिल, ब बाद
यादगार-ए नाल:, इक दीवान-ए बे-शीराज़: था

-मिर्ज़ा ग़ालिब


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